आईआईएम स्नातकों को बरकरार रखने की चुनौती

भले ही भारतीय कापरेरेट जगत तेज गति से बढ़ रहा हो, लेकिन सच्चई यह है कि उनके लिए देश की शीर्ष बिजनेस स्कूलों के स्नातक पेशेवेरों को बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बेहतर वेतन पाने के बाद भी ये पेशेवेर नई चुनौतियों का सामना करने की चाह में नौकरी बदल लेते हैं। यह बात हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आई है।

निल्सन केंपस ट्रेक बी-स्कूल स्टडी की सालाना रिपोर्ट बताती है कि आईआईएम स्नातक 47 प्रतिशत पेशेवेर 3 साल से भी कम समय में बेहतर अवसरों की तलाश के लिए नौकरियां बदल लेते हैं।

नई पीढ़ी के इन पेशेवेरों के लिए आज देश तेजी से फलते-फूलते नौकरी बाजार में व्यापक संभावनाएं हैं। उनके लिए अच्छी प्रतिष्ठा और ब्रांड इमेज खासी अहमियत रखती है। इसके बाद वेतन का स्थान आता है।

औसत वेतन: आईआईएम स्नातकों का वर्तमान वेतन 19 लाख रुपए सालाना तक जा पहुंचा है। इसमें इस साल 19 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। देशी कंपनी से वे 14.2 लाख रुपए सालाना पैकेज की उम्मीद करते हैं, विदेशी कंपनियों के लिए यह बढ़कर 27.2 लाख हो जाता है।

अध्ययन में बताया गया है कि आईआईएम स्नातक नौकरियों के लिए अपने पूर्व छात्रों पर निर्भर रहते हैं। इसके अनुसार 84 प्रतिशत स् नातक कंपनी का वैल्यू फीडबैक अपने सीनियर्स से लेते हैं, 80 प्रतिशत ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण के दौरान होने वाली कंपनियों के आकलन पर, जबकि 74 प्रतिशत नौकरी के पहले होने वाली बातचीत पर।

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