त्योहार और उपहार एक-दूसरे के पूरक

पर्व प्रधान हमारे देश में प्रत्येक माह कोई न कोई पर्व दस्तक देता ही है। कभी-कभी एक ही माह में कई पर्व होते हैं जो हमारे जीवन में आनंद एवं उल्लास भरते हैं। इन्हीं पर्वो के द्वारा ही हमारी संस्कृति आज तक जीवंत बनी हुई है। एक रुटीन लाइफ से हटाकर ये जीवन की उबाऊ एकरसता और नीरसता को दूर करते हैं।
पसंद का भी रखें खयाल
आज के समय में पर्व और उपहार एक-दूसरे के पूरक बनते जा रहे हैं। कोई बड़ा पर्व हो और उपहारों का आदान-प्रदान न हो, आज ऐसा होता ही नहीं है। उपहार आज वक्त की जरूरत बन गए हैं और रिश्तों को जोड़ने में एक बहुत बड़ा माध्यम। किसी के प्रति प्यार, स्नेह, सम्मान, आदर प्रकट करने का एक बड़ा ही सुंदर उपाय है उसे उसकी पसंद के अनुकूल प्यारा-सा गिफ्ट देना। वास्तुशास्त्र एवं अध्यात्म में आस्था रखने वाले जहां प्रकृति से संबंधित पेंटिंग्स, सुंदर से लैंप शेड्स, विभिन्न तरह के फूल एवं मूर्तियां देना पसंद करते हैं, वहीं फेंगशुई से प्रभावित लोग लॉफिंग बुद्धा, थ्री वाइज मैन, मदर ऑफ मर्सी, गुडलक बैम्बू, लविंग बर्ड, थ्रीलेग फ्रॉग, विंड चाइम्स को प्राथमिकता देते हैं। आज मार्केट में क्रिस्टल भी छाया हुआ है। क्रिस्टल के गिफ्ट सभी को आकर्षित करते हैं। संगमरमर, वुड्स, चंदन वुड के सामान भी काफी लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं।
उपहारों की खरीदारी भारत में दीपावली पर्व पर बहुत अधिक होती है। यही एक ऐसा पर्व होता है जिसके लिए लोग महीनों इंतजार करते है। दीपावली पर्व पर जहां एक ओर जहां सोने-चांदी और डायमंड तक के गिफ्ट लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं, वहीं श्री गणेश और मां लक्ष्मी की मूर्तियां गिफ्ट रूप में सर्वाधिक दी जाती हैं। भारतीय ही नहीं, विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी इसी पर्व पर गिफ्ट की बहुत ज्यादा खरीदारी करते हैं।
दिलों को जोड़ते हैं उपहार
उपहार का सीधा संबंध हमारे दिल से होता है। आप जिसको जितना ज्यादा प्यार करते हैं उसके लिए उतना ही सुंदर गिफ्ट खरीदते हैं। गिफ्ट देने के लिए त्योहार से अच्छा मौका कोई हो ही नहीं सकता और जहां तक दीपावली की बात है इस दिन अपनों को उपहार देने से संबंधों की मधुरता बरकरार रहती है। उपहार लोगों को एक-दूसरे से जोड़े रखने की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं जिसके लिए दीपावली से बढ़कर दूसरा मौका नहीं हो नहीं सकता।
एक पहलू यह भी है
आज ज्यादातर लोगों का मानना है कि उपहार एवं पर्व एक दूसरे के पूरक हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे लोग हैं जिनका मानना है कि उपहारों के कारण ही पर्वो से सांस्कृतिक तत्व नष्ट होते जा रहे हैं एवं दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
बनाएं रखें पर्वो की गरिमा
उपहारों के माध्यम से आप एक दूसरे से जुड़ते हैं। एक-दूसरे के निकट आते हैं। अपने ़खास लोगों के लिए आपके दिल में क्या जगह है, यह आपका दिया हुआ उपहार ही बता देता है। उपहार जहां प्रेम और आत्मीयता की भावना से दिए जाते हैं वहां तक ठीक है, किंतु मात्र एक औपचारिकता निभाने या दिखावे के लिए उपहार देना या बजट की कमी होते हुए गिफ्ट देना निश्चित ही कष्टप्रद है। दीप पर्व के दो दिन पहले यदि आप उपहारों के आदान-प्रदान का कार्य कर लेती हैं तो निश्चित ही आप त्योहार का पूरी तरह आनंद उठा पाएंगी और लोगों को उपहार देने का कार्य भी अच्छी तरह से हो जाएगा। इस बात का ध्यान रखें कि उपहारों के आदान-प्रदान के कारण पर्वो की गरिमा कम नहीं होनी चाहिए। उपहार सामाजिक जीवन को और समृद्ध बनाते हैं, उनसे आप एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, लेकिन गिफ्ट लेने-देने के कारण यदि पर्वो की सांस्कृतिक गरिमा में कमी आती है तो वह अनुचित है।

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