पूरी हुई हमसफर की तलाश

अनेक मुस्लिम युवक-युवतियों की हमसफर की तलाश रविवार को पूरी हो गई। वे ईद के बाद विवाह बंधन में बंध जाएंगे। बहुत से ऐसे थे, जिन्होंने रिश्तों की डोर में बंधने एक-दूसरे के परिजनों से मुलाकात कर सिलसिले को आगे बढ़ाया। आचार्य नरेंद्र देव पुस्तकालय में आयोजित ‘मुलाकाती प्रोग्राम’ के जरिए इन्हें यह मौका उपलब्ध कराया, जैनिथ एजूकेशन सोशल वेलफेयर आर्गनाइजेशन ने।

विवाह और कैरियर के प्रति जागरूक:
मुस्लिम समाज के युवक-युवती भी अब अपने विवाह और कैरियर के प्रति जागरूक हो चुके हैं। इसकी झलक रविवार को आचार्य नरेंद्रदेव पुस्तकालय में देखने को मिली, जहां रिश्तों को तलाशने बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। इनमें अधिकतर युवक-युवतियां शिक्षित थीं। बुजुर्गो की सरपरस्ती में रिश्तों के लिए मुलाकातें शुरू हरुई। संस्था जैनिथ और पत्रिका सालेहा के लोगों ने इन मुलाकातों को रिश्तेदारी में बदलने में अहम भूमिका अदा कराई और कामयाबी भी मिली।

दिन भर चले सिलसिले का नतीजा यह निकला कि मौके पर ही 14 रिश्ते तय भी हुए। ग्यारह युवक-युवतियों ने एक-दूसरे का हमसफर बनने के लिए बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। संस्था ने हमसफर की तलाश का काम पहले ही मैग्जीन में करीब आठ सौ युवक-युवतियों का बायोडाटा छाप कर आसान कर दिया था।

आफरीन को मिला यूके का दूल्हा :
अनेक ऐसे युवक भी थे जो सर्विस के कारण विदेश में हैं, परंतु उनके परिजन बहू तलाशने आए थे। इनमें गुजरात के कय्यूम अहमद शामिल हैं, जो यूके में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनका रिश्ता भोपाल की आफरीन से तय हुआ है।

इसी तरह दिल्ली एयरपोर्ट पर कार्यरत अनवर खान और भोपाल की नाजिया, इंदौर के इकलाख हुसैन व शबनम, रहमान और शबाना और बिल्डर शकील खान व रेशमा समेत कुल 14 रिश्ते पक्के हो चुके हैं।

निकाह ईद के बाद
ईद के बाद संस्था द्वारा इज्तिमाई निकाह कराए जाएंगे कराई जाएंगी। अध्यक्ष एसएम हुसैन ने बताया कि संस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों की शादी के लिए मदद करेगी। उन्हें पांच से लेकर दस हजार रुपए का जरूरी सामान और प्रदेश सरकार की कन्यादान योजना का लाभ भी दिलाया जाएगा।

ऐसे कार्यक्रम आज की जरूरत
मुख्य अतिथि के रूप में अल्प संख्यक कल्याण मंत्री अखंड प्रताप सिंह थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मुलाकाती कार्यक्रम आज की जरूरत हैं। अध्यक्षता करते हुए समाज सेवी अलताफ सिद्दीकी ने कहा कि संस्था का यह प्रयास तारीफे काबिल है।

लड़की पढ़ी-लिखी हो
कार्यक्रम में आए एक युवक शफीक अहमद ने बताया कि वे एमकाम हैं और यहां अपने घर के लोगों के साथ इंदौर से आए हैं। वे पढ़ी-लिखी लड़की को जीवनसाथी बनाना पसंद करेंगे। कुछ ऐसी ही बात एमएससी पास मो. साजिद कुरैशी मो. रफीक ने कही। यहां कई तलाकशुदा भी हमसफर तलाश रहे थे।

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