बदले-बदले आशियाने

जिला मुख्यालय का रिहायशी नक्शा नई करवट ले रहा है। लोगों में कम से कम जगह व लागत में नए ढंग के आशियाने खड़े करने की होड़ लगी है।

हालांकि इस शहर में नया मकान बनाने वाले करीब 50 फीसदी लोग आर्कीटेक्ट से नक्शा नहीं बनाते लेकिन अपने घरोंदे को वास्तुशास्त्र के अनुरूप बनाने में उनकी दिलचस्पी बेहद बढ़ी है। छत के बरसाती पानी का संग्रहण करने में भी लोगों की रुचि बढ़ी है।

शहर में आम तौर पर 200 से 300 वर्गगज जमीन के प्लाट पर घर खड़ा करने वाले ही ज्यादा हैं। यहां 200 वर्गगज के प्लाट पर अच्छे मकान के ए क्लास के कंस्ट्रक्शन का खर्चा करीब 11 लाख रुपए आ रहा है। मुख्य इलाकों इंदिरानगर, माननगर, रोड नंबर एक व दो आदि कालोनियों में नया मकान बनाने के लिए जमीन खाली नहीं है।

चूरू बाईपास, अणगासर रोड, मंडावा रोड-सीतसर तक, गुढ़ा रोड-उदावास तक, मोदियों की जाव, रीको सैकंड फेज, रोड नंबर तीन-गोलाई मोड़ तक, अलसीसर रोड, नयासर रोड, मंड्रेला रोड जैसे इलाकों में नई रिहायशी कालोनियां विकसित हो रही हैं। इन्हीं इलाकों में आजकल नए-नए मकान बन रहे हैं। इन क्षेत्रों में जमीन के भाव 800 से दो हजार रुपए वर्ग गज तक चल रहे हैं।

बसंत विहार व किसान कालोनी जैसे इलाकों में जमीनों की रीसेल भी ऊंचे दामों में हो रही है। रोड नंबर एक ने पूरी तरह व्यावसायिक रूप ले लिया है और यहां जमीन के भाव वर्ग गज की जगह पांच हजार रुपए वर्ग फुट के हिसाब से हो गए हैं। ज्यादातर लोग इन इलाकों में आफिस बनाकर बड़ी कंपनियों को 30-40 रुपए प्रति वर्ग फुट किराए पर देने में रुचि दिखा रहे हैं।

* इस साल झुंझुनूं नगरपालिका क्षेत्र में भवन निर्माण नियम लागू होने से इसके अनुरूप ही निर्माण स्वीकृति जारी की जा रही है। बाईलाज के उल्लंघन व बिना स्वीकृति मकान बनाने वाले करीब 100 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चालान किया गया है। शहर में हर महीने औसतन 15 निर्माण स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं।
– राजेंद्र जोशी, नगरपालिका आयुक्त

* लोगों को देख लेना चाहिए कि वे जिस जमीन पर नया मकान खड़ा कर रहे हैं वो पालिका के नियमों में आती है। कृषि भूमि को आवासीय के लिए रूपांतरित कर ही मकान बनाना चाहिए। मकान बनाने से पहले नेशनल बिल्डिंग कोड आफ इंडिया 2005 के बिंदुओं को समझ लेना चाहिए।
– अजय मारवाल, रजिस्टर्ड आर्कीटेक्ट

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