भारतीय पुलिस में सुधार के लिए आचार संहिता के निर्देश

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 4 जुलाई 1985 को भारतीय पुलिस में सुधार के लिए एक आचार संहिता परिचालित की है जिसमें निम्नांकित निर्देश दिए गये हैः-

1) पुलिस को भारत के संविधान के प्रति अटूट निष्ठा रखनी चाहिए और उसके द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुरूप नागरिकों के अधिकारों का सम्मान और उनकी रक्षा करनी चाहिए।
2) पुलिस को किसी भी विधि निर्मित कानून के औचित्य अथवा आवश्यकता पर संशय नहीं करना चाहिए। उनसे बिना भय अथवा पक्षपात, वैमनस्य अथवा प्रतिशोध भाव के कानून को दृढतापूर्वक तथा निष्पक्षतापूर्वक लागू करना चाहिए।
3) पुलिस को अपने अधिकारों और कार्यों की सीमाओं का ज्ञान होना चाहिए तथा आदर करना चाहिए। उन्हें न्यायपालिका के कार्यों में अनाधिकार हस्तक्षेप नहीं
करना चाहिए अथवा अनाधिकार हस्तक्षेप करने का आभास नही देना चाहिए तथा प्रकरणों पर निर्णय देने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए। उन्हें न तो किसी व्यक्ति के
पक्ष में किसी से प्रतिशोध लेना चाहिए और न ही दोषी को दण्ड देना चाहिए।
4) कानून का पालन करवाने में अथवा व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस को समझाने-बुझाने, सलाह तथा चेतावनी के तरीके काम में लाने चाहिएं । इनके असफल हो जाने पर तथा शक्ति का प्रयोग अपरिहार्य हो जाने पर परिस्थितियों की मांग के मुताबिक अल्पतम मात्रा में ही बल प्रयोग करना चाहिए।
5) पुलिस का प्राथमिक कत्र्तव्य अपराध तथा अव्यवस्था को रोकना है। पुलिस को यह समझना चाहिए कि उसकी दक्षता की कसौटी इन दोनों का अभाव है, न कि इनसे निपटने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई का प्रत्यक्ष प्रमाण।
6) पुलिस को यह ज्ञात होना चाहिए कि वे जनता के सदस्य है, अन्तर केवल इतनी ही है कि समाज के हित में तथा उसकी ओर से उन्हें उन कत्र्तव्यों पर पूर्णकालिक ध्यान देने के लिए नियुक्त किया गया है, जिनका निर्वाह करना सामान्यतः प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है।
7) पुलिस को यह समझना चाहिए कि उसके कत्र्तव्यों का कुशलतापूर्वक निर्वहन, उस तत्पर सहयोग की मात्रा पर निर्भर करेगा जो वह जनता से प्राप्त करती है साथ ही यह सहयोग अपने आचरण तथा कार्यों का सार्वजनिक अनुमोदन प्राप्त करने, सार्वजनिक आदर तथा विश्वास अर्जित करने एवं उसे बनाए रखने की उसकी योग्यता पर ही निर्भर होगा।
8) पुलिस को सभी लोगों के प्रति संवेदनशाील तथा विचारवान होना चाहिए और उनके कल्याण का सदा ध्यान रखना चाहिए। उन्हें लोगों की संपत्ति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा का विचार किए बिना सभी को वैयक्तिक सेवा तथा मित्रता अर्पित करने और आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए।
9) पुलिस को आत्महित से बढ़कर कत्र्तव्य हित को समझना चाहिए। चाहे कैसा भी संकट अथवा उत्तेजना हो, उसे शांत तथा प्रसन्नचित रहना चाहिए तथा दूसरों के जीवन की सुरक्षा हेतु जीवन का उत्सर्ग करने को तत्पर रहना चाहिए।
10) पुलिस को सदा सौजन्यशील तथा सुसंस्कृत होना चाहिए। उसे विश्वसनीय तथा अनासक्त होना चाहिए। उसमें आत्मगौरव एवं साहस होना चाहिए और उसे अपने चरित्र तथा जनता के विश्वास को विकसित करना चाहिए।
11) उच्चतम श्रेणी की निष्ठा पुलिस की प्रतिष्ठा का मूलभूत आधार है। इसको समझते हुए पुलिस को अपने व्यक्तिगत तथा शासकीय दोनों ही स्तरों पर आत्मसंयम विकसित करना चाहिए, विचार एवं कार्य में सत्यनिष्ठ एवं ईमानदार रहना चाहिए जिससे कि जनता उन्हें अनुकरणीय नागरिक समझ सके।
12) पुलिस को यह समझना चाहिए कि वह केवल अनुशासन का उच्चतर स्तर, वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अक्षुण्ण आज्ञाकारिता तथा पुलिस बल के प्रति हार्दिक निष्ठा बनाए रखकर और अपने आपको सतत प्रशिक्षण तथा तैयारी की अवस्था में
रखकर ही प्रशासन एवं देश के प्रति अपनी उपयोगिता बढ़ा सकती है।
13) धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक राज्य का सदस्य होने के नाते पुलिस को वैयक्तिक पूर्वाग्रहों से ऊपर उठने का लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और धर्म, भाषाई और क्षेत्रीय या जातीय भिन्नताओं से हटकर भारत के सभी लोगों में मैत्रीभाव और सामान्य भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए और समाज में नारी की प्रतिष्ठा के प्रति और पिछड़े हुए वर्गों के प्रति अनादर की प्रथा को समाप्त करना चाहिए।

पुलिस सुधार के लिए अभी तक किये गये प्रयास

पुलिस सुधार के लिए अभी तक किये गये प्रयास या तो प्रशासनिक थे अथवा निदेशक प्रकृति के जिनमें पुलिस कर्मियों को शपथ की भाँति कानून एवं लोकतंत्र के प्रति निष्ठा की बातें कही गयी थीं। ये उपाय बहुत कारगर प्रमाणित नहीं हुए। पुलिस की स्थिति में कोई सुधार न होते देख कर न्यायपालिका ने इस विषय में जोरदार हस्तक्षेप किया। इस संबंध में विनीत नारायण बनाम भारत संघ (ए0आई0आर0 1998 उच्चतम न्यायलय, 889) तथा प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के मामलों में माननीय उच्चतम न्यायलय द्वारा दिये गये निर्देश-निर्णय बहुत महत्वपूर्ण हैं। विनीत नारायण बनाम भारत संघ में आरोप था कि हवाला मामले में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के कारण सी0बी0आई0 तथा राजस्व विभाग ने मामले की यथोचित जाँच नहीं की। माननीय उच्चतम न्यायलय ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि भारत सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर केवल राज्य के पुलिस प्रमुख ही नहीं बल्कि पुलिस अधीक्षक एवं उनसे ऊपर के सभी अधिकारियों की नियुक्ति, कार्यकाल, स्थानान्तरण एवं पदस्थापन के संबंध में युक्ति – संगत प्रक्रिया स्थापित करेगी।

प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ के मामले में पुनः उच्चतम न्यायालय ने पुलिस सुधार की शीघ्र आवश्यकता बताते हुए भारत सरकार को पुलिस पदाधिकारियों के स्थानान्तरण, पदस्थापन तथा कार्यकाल आदि के विषय में पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने के साथ-साथ पुलिस को राजनैतिक दबाव से मुक्त रखने हेतु व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। माननीय न्यायलय ने यह भी निर्देश दिया की जबतक राज्यों द्वारा अपने पुलिस अधिनियम की रचना नहीं कर ली जाती है तबतक वे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा निर्देश के अनुरूप पुलिस व्यवस्था संचालित करेगें। माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर भारत सरकार ने 2006 में पुलिस एक्ट ड्राफ्टींग कमिटी गठित की जिसने 25 अगस्त 2006 को पुलिस अधिनियम की रूप-रेखा समर्पित की। माननीय उच्चतम न्यायलय ने प्रारूप पुलिस अधिनियम की रूप-रेखा जारी करते हुए पुलिस सुधार से संबंधित निम्नांकित सात निर्देश जारी कियेः-

1. राज्य सरकारें एक राज्य सुरक्षा कमीशन गठित करेंगी जो पुलिस के लिए नीति-निर्धारण करेगी। इससे राज्य सरकार का पुलिस पर अनावश्यक दबाव नहीं रहेगा।
2. राज्य के पुलिस महानिदेशक का चुनाव वरीयतम तीन अधिकारियों में से किया जायेगा।
3. थाना प्रभारी एवं उससे ऊपर के क्षेत्रीय अधिकारियों का कार्य-काल कम से कम दो साल का होगा।
4. पुलिस को अनुसंधान तथा विधि-व्यवस्था इन दो भागों में विभक्त किया जायेगा।
5. प्रत्येक राज्य में एक पुलिस स्थापना परिषद होगी जो पुलिस अधिकारियों का स्थानान्तरण, पदस्थापन आदि निर्धारित करेगी।
6. जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकार गठित किया जायेगा जो पुलिस के विरूद्ध शिकायतों की जाँच करेगा।
7. केन्द्र सरकार ऐसे राष्ट्रीय सुरक्षा कमीशन की स्थापना करेगी जो केन्द्रीय संगठनों में पुलिस पदाधिकारियों के पदस्थापन के लिए पैनल तैयार करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *