2000 साल के सैक्स चित्रण पर ब्रिटेन में प्रदर्शनी

पुलिस ने गेट्सहैड में बाल्टिक आर्ट गैलरी से हाल ही में एक जाने-माने अमेरिकन फोटोग्राफर नान गोल्डिन की खींची और सर एल्टन जॉन की मिल्कियत वाली फोटोग्राफ हासिल की। गैलरी के डायरेक्टर्स भी उसे देखकर ताज्जुब में थे। गोल्डिन की इस तस्वीर ने ब्रिटेन में एक नई बहस को ही जन्म दे दिया कि आर्ट और पोर्नोग्राफी में आखिर फर्क कहां है?

क्लेयर और ऐडा नाम की लड़कियों की बैली डांसिंग की यह तस्वीर क्या बाल यौन अपराध का नमूना है या गोल्डिन और बाल्टिक म्यूजियम की प्रतिष्ठा इस तस्वीर को कला का दर्जा हासिल कराने में कामयाब रही है?

ब्रिटेन में बार्बिकन की नई प्रदर्शनी “सिड्यूस्ड: आर्ट एंड सैक्स” के तहत इसी बिंदु को समझने की कोशिश चल रही है। 12 अक्टूबर से 27 जनवरी तक चलने वाली प्रदर्शनी में 2000 साल के बीच रची-बुनी गई 70 कलाकारों की 250 सैक्स कृतियों को रखा गया है। प्रदर्शनी के जरिए यह जाहिर करने की कोशिश की गई है कि किस तरह अभी तक बुनी और रची गई कृतियों में सैक्स को प्रदर्शित करने, छिपाने और हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने की कोशिशें की जाती रही हैं। साथ ही यह कि कहां आर्ट खत्म होती है और पोर्नोग्राफी शुरू होती है?

भारतीय अभिलेखों, चीनी वाटर कलर्स, पेंटिंग्स, अभिलेख, फोटोग्राफ, वास्तु के नमूने, लकड़ी के नमूने, वीडियो और जापानी प्रिंट्स की इस प्रदर्शनी में फ्रैगोनार्ड का ‘द ब्यूटीफुल सर्वेट’ नामक चित्र भी है। रतिक्रिया से जुड़ी दुनिया की सबसे ज्यादा क्लासिकल तस्वीरों को यहां देखकर लोगों और इन तस्वीरों के बीच क्या रिश्ता बनेगा, इसे सिड्यूस्ड के आयोजकों ने भुनाने की पूरी कोशिश की है।

कामसूत्र के हिस्से भी हैं प्रदर्शनी का हिस्सा
जिन कलाकारों की कृतियां रखी गई हैं, उनमें फ्रांसिस बेकन, लुई बोर्जियू, रैम्ब्रां, जीन होनोर फ्रैगोनार्ड, ग्वेर्सिनो, जैफ कून्स, रॉबर्ट मैपलथॉर्प, पाब्लो पिकासो, ऑगस्ट रोडिन, इगोन शिएल, कितागावा उटामारो और एंडी वारहोल शामिल हैं। वॉयस ऑफ सैक्स के नाम से एक ध्वनि कृति भी इसमें रखी गई है जिसमें वात्स्यायन के कामसूत्र, लोलिता और माक्र्विस द साद की किताबों से कुछ हिस्सों को पढ़कर सुनाया गया है। प्रदर्शनी में कुछ खास दिनों के लिए प्रदर्शनी की थीम से जुड़े संगीत और नृत्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी महिलाओं और 18 साल से ऊपर सभी लोगों के लिए खुली है।

पॉम्पेई से मिली चीजों से शुरू हुआ प्रदर्शनी का इतिहास
रति विषयक चीजों की प्रदर्शनी का इतिहास 18वीं सदी में भी खोजा जा सकता है। विसुवियस ज्वालामुखी से बर्बाद हुए रोमन साम्राज्य के शहर पॉम्पेई की खुदाई में जुटे आर्कियोलॉजिस्ट्स को ऐसी चीजें मिलीं, जिन्हें देखकर वे हैरान रह गए थे। लैंप्स, म्यूराल्स, प्रतिमाएं, जग और दूसरे सामान पर हर जगह बस सैक्स और उससे जुड़ी मुद्राओं का ही वर्णन था। इसे देखकर रोमन साम्राज्य के बारे में इतिहासकारों का विचार ही हमेशा के लिए बदल गया। अब इस सामान को रखा कहां जाता? तो 1795 में एक गुप्त बक्से (गैबिनेटो सरगेटो) में इन चीजों को रख दिया गया। साथ ही एक पाबंदी भी लगा दी गई कि इन चीजों को किसी को नहीं दिखाना है क्योंकि ये लोगों को गुमराह करेंगी। केवल चारित्रिक तौर पर मजबूत और पैसे वालों को ही इन्हें देखने की इजाजत थी।

पोर्नोग्राफी शब्द की परिभाषा में शामिल था पॉम्पेई का उदाहरण
1864 में जब डिक्शनरी में पहली बार पोनरेग्राफी शब्द की परिभाषा दी गई तो इसके लिए पॉम्पेई की रति से जुड़ी पेंटिंग्स से तुलना की गई। 7 साल पहले इस कैबिनेट को खोला गया और अब यह नेपल्स में नेशनल आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में लोहे के दरवाजों में रखा है। इसे देखने के लिए अब सिर्फ एक अतिरिक्त टिकट ही लेना पड़ता है।

1861 में एक ब्रिटिश दानदाता ने ब्रिटिश म्यूजियम को मानवता के 434 शुरुआती पूजा प्रतीकों को दान दिया था तो भी यही दिक्कत आई कि इन्हें कहां रखा जाए। आखिर इनके लिए एक अलग कमरे को बनाकर उसमें इन्हें रखा गया।

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