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सुप्रीम कोर्ट ने पान मसाला, गुटखा और सुपारी को खाद्य पदार्थ की Ÿोणी में मानते हुए कहा है इन पर लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत रोक लगा सकती है।

महाराष्ट्र, आंध्र, तमिलनाडु और गोवा में पान मसाला और गुटखा के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मत व्यक्त किया।

कोर्ट ने इन राज्यों में पान मसाला और गुटखा के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगाने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अपना यह मत दिया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की धारा 23 (1ए-एफ) के तहत गुटखा और पान मसाले पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, राज्यों के पास नहीं।

जस्टिस केजी बालकृष्णन और जस्टिस वीएन श्रीकृष्ण ने पान मसाला उत्पादकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 2003 के एक फैसले के आधार पर दिए गए उस तर्क को नकार दिया कि ‘चाय भी आहार नहीं’ है ।

जज ने कहा कि चाय के बारे में दिए गए फैसले के आधार पर पान मसाला और गुटखा के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

अदालत की एक बेंच ने पिछले वर्ष नवंबर में फैसला दिया था कि चाय खाद्य पदार्थ नहीं है क्योंकि इसे आमतौर पर आहार या खाद्य पदार्थ नहीं समझा जाता और न ही भाषा विज्ञानी ऐसा मानते है।

विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी महाराष्ट्र की सुशील कुमार शिंदे सरकार ने बुधवार को किसानों को मुफ्त बिजली देने का फैसला कर विपक्षी शिवसेना- भाजपा के चुनावी वायदे की हवा निकाल दी। किसानों को यह सुविधा गत एक जुलाई से दी जाएगी।

कुछ समय पूर्व ही शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने वायदा किया था कि शिवसेना-भाजपा सत्ता में लौटी तो किसानों को मुफ्त बिजली दी जाएगी और उनके ऋण माफ किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को यहां मंत्रिमंडल की साप्ताहिक बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव सितंबर- अक्टूबर में होने वाले हैैं। उप मुख्यमंत्री विजयसिंह मोहिते पाटिल ने बताया कि इस निर्णय से राज्य सरकार पर हर तीन महीने में 400 करोड़ रुपये की हानि होगी।

शिंदे ने बताया कि एक जुलाई से लागू इस फैसले से 23 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। शिंदे ने दावा किया कि यह निर्णय आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि किसानों के समक्ष मौजूद अत्यंत गंभीर समस्या को देखते हुए किया गया है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस निर्णय से किसानों के बीच एक अच्छा संदेश जाएगा। शिंदे ने स्पष्ट किया कि मुफ्त बिजली कृषि कार्यों के लिए दी जाएगी घरेलू उपयोग के लिए नहीं। यह फैसला पुराने बिजली के बकाया बिलों पर लागू नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने बिजली बिल माफ करने के लिए कृषि संजीवनी योजना है जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में पचास फीसदी रकम माफ की जाती है और इस योजना को नवंबर तक बढ़ा दिया गया है।

पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में मौसम के बदलते तेवर के कारण मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश के कारण राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। सोमवार रात को बाढ़ से कम से कम २० मजदूरों की मौत हो गयी और हजारों लोग बेघर हो गए।

एक वरिष्ठï पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य के सेप्पा जिले में एक पत्थर खान में काम कर रहे कई मजदूर बाढ़ के पानी में अचानक घिर गए। पास की पक्के नदी में उफान के कारण मजदूर अचानक पानी में घिर गए। प्रशासन ने कम से कम २० मजदूरों के मारे जाने की पुष्टिï कर दी है।

एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि कई और मजदूर लापता हैं और शायद उनकी मौत हो गयी होगी। अधिकारी ने कहा कि इलाके का राज्य के दूसरे हिस्सों से संपर्क टूट गया है। इसी तरह दूसरे कई इलाकों का भी राज्य के शेष हिस्से से संपर्क भंग हो गया है।

अधिकारी के मुताबिक कई जगहों पर तो इस नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच चुका है। पिछले तीन दिनों से जिले में मूसलाधार बारिश हो रही है। यह इलाका चीन सीमा से सटा है।

सेप्पा के जिलाधिकारी वाई. डी. थोंगची ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि जिले में बाढ़ की स्थिति काफी गंभीर हो गयी है और कई जगहों पर पानी का स्तर सामान्य स्तर से पांच मीटर ऊपर हो गया है।

उन्होंने कहा कि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य में प्रशासन को भारी सुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। पानी की धार इतनी तीक्ष्ण है कि नौका से भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है।

थोंगची ने बताया कि पानी की तेज धार में सैकड़ों मकान और पशु बह गए हैं। लाखों की फसल बर्बाद हो चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर हो गयी है कि प्रशासन को सेना की मदद लेनी पड़ी है।

थोंगची ने कबूल किया कि जिले का महकमा इस स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं है। ऐसे में हमें सेना की मदद लेनी पड़ी है। हजारों लोग ऊंचे बांधों और सामुदायिक भवनों में पनाह लिए हुए हैं।

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