Career in Multimedia Sector

सृजनशीलता और कला पहले मनुष्य के दिमाग तक सीमित थी। कलात्मक सोच और हाथों के हुनर से वह नई-नई रचनाएं करता था। गायक के लिए उसका गला ही एक मात्र संबल होता था। किंतु समय के साथ आज काफी कुछ बदल गया है। कला के सभी क्षेत्रों में अब की-बोर्ड, माऊस, डिजिटल पेन जैसे तकनीकी उपकरणों ने अपना स्थान बना लिया है। स्केचिंग, ग्राफिक्स डिजाइनिंग, पैटर्न मेकिंग तथा पेंटिंग जैसे क्षेत्रों में भी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा चित्रों को गति देने का कार्य भी कंप्यूटर की मदद से ही किया जाता है। आजकल गायक की आवाज में विशेष प्रभाव देने तथा संगीत निर्माण में भी कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है। कंप्यूटर से जुड़े इन सभी सृजनात्मक कार्यो का अध्ययन मल्टी मीडिया के तहत किया जाता है।

डिजाइनिंग एवं एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के साथ प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए मल्टी मीडिया वरदान की तरह साबित हो रहा है। फिल्मों तथा न्यूज चैनलों में इसके नित नए प्रयोग देखने को मिलते हैं। कार्टून फिल्में तथा कंप्यूटर गेम तो पूरी तरह मल्टी मीडिया पर ही आधारित होते हैं। इसके अलावा कई ऐसे नए क्षेत्र हैं जिनमें मल्टी मीडिया के प्रयोग शुरू हुए हैं।
आजकल अपने विविध प्रयोगों के कारण युवाओं में मल्टी मीडिया के प्रति विशेष रुचि देखी जा रही है और इसका व्यापक आधार भी है। विभिन्न क्षेत्रों में मल्टी मीडिया के जानकारों की अच्छी मांग है तथा इसे एक अच्छे कैरियर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

कार्य की प्रकृति
मल्टी मीडिया का क्षेत्र विस्तृत है। चित्रों के निर्माण से लेकर इनको गति देने की पूरी प्रक्रिया के दौरान हर स्तर पर इसका उपयोग होता है। 2-डी और 3-डी चित्रों तथा ग्राफिक्स का निर्माण मल्टी मीडिया का मौलिक कार्य है। विभिन्न कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के प्रयोग से इन चित्रों को गति प्रदान की जाती है। इसके अलावा वीडियो के साथ रेखा चित्रों की मिक्सिंग का काम भी मल्टी मीडिया विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है। साउंड एडिटिंग सॉफ्टवेयर के प्रयोग से ध्वनि के विशेष प्रभाव देने का काम होता है। प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन, फिल्मों तथा वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में आज मल्टी मीडिया का काफी तेजी से उपयोग हो रहा है। इसके अलावा कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो भारतीय मल्टी मीडिया व्यवसाय के लिए अभी नए हैं। इन क्षेत्रों में भी विकास बहुत तेजी से हो रहा है। इनमें प्रमुख है :

कार्टून फिल्में : कार्टून फिल्मों के निर्माण में एनिमेशन व मल्टीमीडिया की सर्वाधिक भूमिका होती है। पहले कार्टून फिल्में भारत में विदेशों से बनकर आती थी लेकिन अब देश में ही इनका निर्माण होने लगा है। विदेशों से भी कई कार्टून फिल्में भारत में आ रही हैं। इसमें 3-डी, 2-डी एनिमेशन तथा साउंड इफेक्ट्स का उपयोग किया जाता है।

फैशन तथा इंटीरियर : फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में नए डिजाइनों की कल्पना करनी होती है। इसके लिए मल्टी मीडिया का प्रयोग काफी उपयोगी होता है।

इंटीरियर डेकोरेशन : इंटीरियर डेकोरेशन में 3-डी मॉडलिंग तथा ग्राफिक्स का प्रयोग होता है। मल्टी मीडिया के प्रयोग से बेहतर डिजाइन बनाने में सुविधा होती है। कंप्यूटर स्क्रीन पर ही डिजाइनर नए-नए प्रयोग कर सकता है।

गेमिंग : यह मल्टी मीडिया से जुड़ने वाली नवीनतम शाखा है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के वीडियो, कंसोल, कंप्यूटर, मोबाइल तथा हैंडसेट गेम का निर्माण किया जाता है। मल्टी मीडिया तकनीकों के प्रभाव द्वारा इसमें मूविंग इमेज तथा साउंड इफेक्ट्स पैदा किए जाते हैं। इसके बाद गेम इंजन का प्रयोग करके इनके इमेज को की बोर्ड या माऊस द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारत में अब गेमिंग उद्योग तेजी से बढ़ रहा है जिसमें युवाओं के लिए अनेक संभावनाएं हैं।

पाठयक्रम
मल्टीमीडिया के अंतर्गत पेज सेटिंग, ग्राफिक्स डिजाइन, 2-डी एवं 3-डी एनिमेशन, साउंड एडिटिंग, फोटो एडिटिंग, वीडियो एडिटिंग, साउंड मिक्सिंग, वीडियो मिक्सिंग, स्पेशल इफेक्ट्स, वेब डिजाइनिंग, कंप्यूटराइज्ड ड्रेस डिजाइनिंग, विज्ञापन डिजाइनिंग, कंटेंट राइटिंग इत्यादि तकनीकों का अध्ययन शामिल है। इसके अलावा  आधुनिकतम सॉफ्टवेयर माया भी मल्टीमीडिया पाठ्यक्रम का हिस्सा है। मल्टी मीडिया पाठयक्रमों के साथ खास बात यह है कि इसमें प्रवेश के लिए किसी बड़ी डिग्री की कोई आवश्यकता नहीं होती। अधिकतर पाठ्यक्रमों के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ही पर्याप्त होता है। कई संस्थानों द्वारा मल्टीमीडिया में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट व पीजी डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जाते हैं। कुछ विश्वविद्यालय एनिमेशन में एमए पाठयक्रम भी संचालित कर रहे हैं।

संभावनाएं
प्रिंट मीडिया में ग्राफिक डिजाइनर, इलस्ट्रेटर इत्यादि के रूप में अच्छे अवसर मौजूद हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी इन विशेषज्ञों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। जहां रेडियो में साउंड एडिटर तथा टेक्नीशियन के रूप काम दिया जाता है, वहीं टीवी चैनल, फिल्म तथा वीडियो उद्योग में मल्टीमीडिया विशेषज्ञ, ग्राफिक डिजाइनर, साउंड रेकॉर्डिस्ट, साउंड एडिटर, वीडियो एडिटर, एनिमेटर आदि के रूप में प्रवेश पाते हैं। इसके अलावा गेमिंग विशेषज्ञों के लिए डिजिटल गेम बनाने वाली कंपनियों में अच्छे अवसर हैं। इन सभी क्षेत्रों में विदेशों से भी काफी काम भारत में आ रहा है। विदेशी टीवी कार्यक्रम, फिल्म व कार्टून शो एडिटिंग तथा स्पेशल इफेक्ट्स के लिए यहां भेजे जाते हैं। अपनी रुचि को ध्यान में रखते हुए अगर प्रशिक्षण लिया जाए तो मल्टीमीडिया के क्षेत्र में एक बेहतरीन कैरियर की शुरुआत की जा सकती है।

संस्थान
सेंटर फार डेवलपमेंट आफ एडवांस कंप्यूटिंग, ए-335, सिवालिक, मालवीय नगर के निकट, नई दिल्ली-110017, फोन: 011-26681156, 26681206
वेब साइट: www.cdac.org
सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी ऑफ इंडिया, मोहाली, चंडीगढ़
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पालदी, अहमदाबाद
एरेना मल्टीमीडिया,  13, रिंग रोड, साउथ एक्स, पार्ट-1 नई दिल्ली-110049, फोन : 011-51646648/49
वेबसाइट – www.arens-multimedia.com
जागरण इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्यूनिकेशन एफ-33, सेक्टर-6, नोएडा, फोन : 0120-3950369,
वेबसाइट : www.pixelgaloxystudio.com
माया एकेडमी ऑफ एडवरटाइजिंग एंड सिनेमेटिक्स, ई-19, साउथ एक्सटेंशन, पार्ट -2, दिल्ली, फोन : 011-24653026,
वेबसाइट : www.mayanet. com
एफटेक एन-30, द्वितीय तल, मालवीय नगर,नई दिल्ली-110017, फोन: 011-26685482, 26689945
वेबसाइट: www.fshrd. org
भारतीय विद्या भवन कस्तूरबा गांधी मार्ग, नई दिल्ली-1 फोन : 011-23389942
वेबसाइट: www.bvbdelhi.org
ऑक्सफोर्ड सॉफ्टवेयर इंस्टीटयूट 3ए/91, न्यू पूसा रोड, नियर राधा स्वामी सत्संग, सेंट माइकल चर्च के सामने, नई दिल्ली-5, फोन: 25825873, 25818356
आर-टूंज मेन रोड, बुराड़ी, दिल्ली फोन-011-27614437
वेबसाइट : www.rtoonz.com

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