My dad, not my superhero!

पुलिस ने शृंखलाबद्ध छापे मार कर आतंकी गतिविधियों के संदेह में एशियाई मूल के 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।

सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने देशभर में कई घरों पर छापे मार कर 20–30 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को गिरफ्तार किया। इन्हें आतंक से संबंधित धन के लेन-देन, तैयारी करने और उकसाने में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है।

बीबीसी ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग एशियाई मूल के थे जबकि मेट्रोपोलिटन पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि किसी अपराध में आरोपित किए जाने से पहले इनकी राष्टï्रीयता के बारे में नहीं बताया जाएगा। धरपकड़ के इस अभियान में खुफिया सेवा एमआई-5 और पुलिस शामिल थी।

प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पर ब्रिटेन पर मंडरा रहे आतंकी खतरे के स्वरूप का विवरण देने के लिए दबाव पडऩे के बाद ये गिरफ्तारियां की गर्ईं हैं।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन अल कायदा के संभावित हमलों की खुफिया रिपोर्र्टों के बाद अमेरिका ने विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), न्यूयॉर्क शेयर बाजार और दूसरे वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा के लिए हाई अलर्ट की घोषणा की है।

आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के पांच स्तरीय अलर्ट व्यवस्था में यह हाई या ऑरेंज अलर्ट दूसरा सबसे बड़ा अलर्ट है जो आतंकवादी हमलों के गहरे खतरों को दर्शाता है।

पश्चिमी पूंजीवाद के प्रतीक इन वित्तीय संस्थानों को पहली बार हमलों के संभावित निशाने के रूप में चिह्निïत किया गया है। आंतरिक सुरक्षा मंत्री टाम रिज ने कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक के भवनों पर अल कायदा के संभावित हमले की जानकारी मिली है।

उन्होंने न्यूयॉर्क शेयर बाजार, सिटीग्रुप इंक और नेवार्क स्थित प्रूडेंशियल फाइनेंशियल के भवनों को भी अल कायदा के संभावित लक्ष्य होने की जानकारी दी।

व्हïाइट हाउस की प्रवक्ता एरिन हिली ने कहा कि सुरक्षा अलर्ट जारी करने के रिज के सुझाव से सहमत होकर राष्ट्रपति ने आज अंतिम रूप से फैसला कर लिया।

न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा कि पुलिस महत्वपूर्ण जगहों पर कड़ी नजर रख रही है। अमेरिकी खुफिया संगठन पहले ही इस वर्ष नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के पहले आतंकी हमले होने की आशंका जता चुके हैं।

रिज ने कहा कि इन हमलों के तत्काल होने के बारे में कोई खबर नहीं है। यह पूछने पर कि संभावित हमलों के बारे में अमेरिका को कहां से जानकारियां मिलीं, रिज ने पाकिस्तान को महत्वपूर्ण सहयोगी बताया, लेकिन किसी अन्य देश का नाम नहीं लिया।

‘हमें मारना है, तो एक बार में मार दो, पर इस तरह तड़पा-तड़पा कर मत मारो।’ तहसील इंद्री के गांव जैनपुर साधान के करीब दो सौ मुस्लिम परिवार गांव की पंचायत से रहम की यही भीख मांग रहे हैं। ये परिवार अपने ही गांव में कैदियों की तरह नजरबंद हो गए हैं।

पंचायत ने मारपीट की एक छोटी सी घटना के बाद इन परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर दिया है और अब इन्हें गांव से खदेडऩे की तैयारी चल रही है। पंचायत के बहिष्कार के फैसले के कारण दाना-पानी तक के लिए मोहताज इन मुस्लिम परिवारों की व्यथा सुनने वाला कोई नहीं है।

घोड़े पालने व बेचने का धंधा करने वाले इन मुस्लिम परिवारों की आर्थिक हालत भी काफी खराब हैं। ये गांव से बाहर बनी एक बस्ती में रहते हैं। बहिष्कार के कारण गांव में उनसे कोई बातचीत नहीं करता है। गांव में करियाणा की दुकान से उन्हें सौदा नहीं मिलता, दर्जी कपड़े नहीं सिल रहे हैं, डाक्टर उनका इलाज नहीं कर रहे हैं।

यहां तक की उनकी महिलाओं को शौच के लिए खेत में भी घुसने नहीं दिया जा रहा है। इस बात की सूचना कई बार पुलिस को दी गई, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। गांव के सबसे बुजुर्ग मुस्लिम कासिम अली हर अजनबी के सामने हाथ फैलाकर रहम की भीख मांगने लगते हैं। वे कहते हंै, पिछले तीन महीने से उनकी हालत नरक जैसी हो गई है।

सबसे खराब स्थिति इन परिवारों की महिलाओं की हैं। पंचायत के फैसले के कारण इन्हें शौच के लिए करीब दो किलोमीटर दूर जाना होता है। मवेशी के लिए घास और खुद के लिए पानी तक के इंतजाम के लिए उन्हें ऐसी ही कवायद करनी पड़ती है।

गांव के सरपंच दिलबाग सिंह स्वीकार करते हैं कि गांव वाले इन शेखों (मुस्लिम) को यहां रहने नहीं देना चाहते हैं। गांव वाले इन परिवारों पर काफी क्रोधित हैं और इनके प्रति घृणा का भाव भी है।

सरपंच के मुताबिक इस विवाद की शुरुआत मई महीने के पहले सप्ताह में हुई। जब एहसान की घोड़ी बोतडू़ के टमाटर की खेत में घुस गई और फसल को नुकसान पहुंचा दिया। जब बोतडू ने इसका विरोध किया तो नौबत मारपीट की आ गई। इस घटना के बाद पूरा गांव शेखों (मुस्लिमों) के खिलाफ हो गया।

बाद में सात शेखों की गिरफ्तारी के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद गांव की पंचायत ने इन शेखों के बहिष्कार का फैसला लिया। पंचायत में ही यह फैसला हुआ कि गांव का कोई भी आदमी इनसे बोलचाल भी करेगा तो उसे पांच हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा।

दूसरी ओर हुक्मदीन का आरोप है कि गांव के दबंग जमींदार उन्हें उजाडक़र शामलात की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्हें तंग कर करने की नीयत से ही उनका हुक्का-पानी बंद किया गया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका से भी मुस्लिम परिवार दंग हैं। वे बार-बार थाना जाकर आजिज आ चुके हैं।

पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री इंद्री आए थे तो इन परिवारों ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की थी। मगर, उन्हें मिलने नहीं दिया गया। इस संबंध में थाना इंद्री के एसएचओ अंगरेज सिंह के मुताबिक उन्होंने किसी को भी मुख्यमंत्री से मिलने से नहीं रोका है।

उनके मुताबिक यह गांव की पंचायत की मामला है। इस कारण इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। अगर मारपीट की स्थिति बनेगी, तो पुलिस जरूर हस्तक्षेप करेगी।

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